रायपुर। बीरभूम और पश्चिम बर्धमान के निवासियों के लिए वर्षों से चली आ रही “रुको-चलो” की परेशानी अब इतिहास बन गई है। केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने सिउड़ी रोड ओवरब्रिज (ROB) का उद्घाटन किया तथा कुमारपुर रोड ओवरब्रिज को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर सुवेंदु अधिकारी, नेता प्रतिपक्ष, पश्चिम बंगाल विधानसभा भी उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम क्षेत्र के तीव्र आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।
इस ऐतिहासिक अवसर पर क्षेत्रवासियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया, जिनकी “गति शक्ति” की दूरदृष्टि और भारतीय रेल के परिवर्तन के संकल्प ने पश्चिम बंगाल के लोगों को विश्वस्तरीय अधोसंरचना का यह उपहार दिया।
सिउड़ी ROB: बीरभूम की नई ₹42 करोड़ की जीवनरेखा
दशकों तक “22B/T” लेवल क्रॉसिंग जाम और झुंझलाहट का प्रतीक रहा, जहाँ यात्रियों को ट्रेनों के गुजरने तक लगभग 30 मिनट तक इंतजार करना पड़ता था। आज यह इंतजार इतिहास बन गया है। सिउड़ी ROB केवल एक पुल नहीं, बल्कि आगे बढ़ते जिले के लिए स्थायी समाधान है।
सेकंड बचें, जीवन बचे: सिउड़ी जिला अस्पताल से बोलपुर या कोलकाता ले जाए जा रहे मरीजों को अब जानलेवा देरी का सामना नहीं करना पड़ेगा। “गोल्डन ऑवर” अब ट्रेन शेड्यूल का मोहताज नहीं।
शिक्षा व संस्कृति से सेतु: विश्व-भारती विश्वविद्यालय जाने वाले छात्र अब समयबद्ध और निर्बाध यात्रा कर सकेंगे। बोलपुर की सुविधाएँ सिउड़ीवासियों के लिए “क्विक कम्यूट” बन गई हैं—सोनाझुरी हाट या कंकालीतला मंदिर की यात्राएँ अब आसान।
आर्थिक मिठास: सिउड़ी का विश्व-प्रसिद्ध मुरब्बा और अचार अब शांतिनिकेतन के पर्यटक-बहुल बाजारों तक तेज़ी से पहुँचेंगे, जिससे स्थानीय छोटे व्यवसायों और विक्रेताओं को बड़ा लाभ मिलेगा।
रियल एस्टेट व राहत: खुले रास्ते का मनोवैज्ञानिक सुकून तो है ही, साथ ही सिउड़ी-बोलपुर कॉरिडोर में बेहतर कनेक्टिविटी से संपत्ति मूल्यों में वृद्धि की प्रबल संभावना है।
कुमारपुर ROB: जीटी रोड की हाई-स्पीड धड़कन
जहाँ सिउड़ी को नई जीवनरेखा मिली है, वहीं पश्चिम बर्धमान में कुमारपुर ROB ग्रैंड ट्रंक रोड के औद्योगिक प्रवाह में क्रांति लाने को तैयार है। शहर के प्रमुख “चोक-पॉइंट” को हटाकर यह पुल सुनिश्चित करता है कि उद्योगों के पहिए बिना रुके घूमें।
औद्योगिक इंजन को ईंधन: कोयला और स्टील ले जाने वाले भारी वाहन अब पुराने ट्रैफिक जाम से मुक्त होकर पश्चिम बंगाल-झारखंड सीमा तक आपूर्ति श्रृंखला को सुचारु बनाएँगे।
तनाव से मुक्ति: इंजन आइडलिंग खत्म होने से हजारों यात्रियों का ईंधन बचेगा। साथ ही, पहले खतरनाक रहे रेलवे चौराहे पर दुर्घटनाओं का जोखिम स्थायी रूप से समाप्त होगा।
शहर का एकीकरण: बाराचक जैसे उपनगरीय क्षेत्र अब आसनसोल शहर केंद्र से निर्बाध रूप से जुड़ेंगे—दैनिक मज़दूरों, कार्यालय कर्मियों और छात्रों की समयबद्धता सुनिश्चित होगी।
नए बंगाल के लिए इंजीनियरिंग प्रगति
ये दोनों परियोजनाएँ सर्व-मौसम कनेक्टिविटी और औद्योगिक मजबूती की साझा दृष्टि को साकार करती हैं। जोखिमपूर्ण लेवल क्रॉसिंग की जगह अत्याधुनिक इंजीनियरिंग समाधानों से मंत्रालय यह सुनिश्चित कर रहा है कि बीरभूम की जीवंतता और पश्चिम बर्धमान की औद्योगिक ताकत अब किसी “क्लोज़्ड गेट” से बाधित न हो।





