Featureछत्तीसगढ़

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर रायपुर में ‘छत्तीसगढ़ी हथकरघा परिधान’ फैशन शो का आयोजन

रायपुर। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राजधानी रायपुर में ‘छत्तीसगढ़ी हथकरघा परिधान’ फैशन शो का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश की पारंपरिक हथकरघा कला, बुनकरों की रचनात्मकता तथा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहित करना रहा।

फैशन शो में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हथकरघा परिधानों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में सुकमा स्थित पुनर्वास केंद्र की आत्मसमर्पित महिलाओं ने भी रैंप वॉक में सहभागिता की। उन्होंने पारंपरिक छत्तीसगढ़ी परिधान धारण कर अपनी प्रस्तुति दी।

इस अवसर पर फिल्मकार एवं निर्देशक आकाश आदित्य लामा ने महिलाओं की प्रस्तुति की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक बदलाव और आत्मविश्वास की सकारात्मक अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने बस्तर एवं छत्तीसगढ़ की संस्कृति, पारंपरिक परिधानों और स्थानीय पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।

आकाश आदित्य लामा ने भविष्य में इन महिलाओं के साथ फिल्म में कार्य करने की इच्छा भी व्यक्त की। उन्होंने बताया कि वह एक विषय पर लंबे समय से कार्य कर रहे हैं और परिस्थितियां अनुकूल रहने पर उनके साथ काम करना उनके लिए सौभाग्य की बात होगी।

लामा ने छत्तीसगढ़ एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से अपने जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि शांति और पुनर्वास के साथ स्थानीय लोगों को नए अवसर उपलब्ध कराना सामाजिक एवं आर्थिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने फिल्मकार आकाश आदित्य लामा द्वारा व्यक्त की गई इस इच्छा का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव यदि उद्योग एवं रचनात्मक क्षेत्रों में भी दिखाई देता है और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से मुख्यधारा में लौट रहे लोगों के लिए नए अवसर उपलब्ध होते हैं, तो यह स्वागतयोग्य पहल है।

उन्होंने कहा कि कला, संस्कृति, फिल्म एवं अन्य रचनात्मक क्षेत्रों के माध्यम से लोगों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर मिलना सामाजिक समावेशन की दिशा में महत्वपूर्ण है।

खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के सचिव राजेश राणा ने आयोजन को प्रेरणादायी बताते हुए कहा, “यह आयोजन हमारे प्रेरणादायी रहा है, और इसकी चर्चा सब तरफ हो रही है। आने वाले समय में भी इस तरह के बेहतर आयोजन विभाग की तरफ से किए जाएंगे।”

उन्होंने कहा कि प्रदेश की हथकरघा परंपरा को प्रोत्साहित करने तथा बुनकरों को व्यापक बाजार एवं नए मंच उपलब्ध कराने के लिए विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम के माध्यम से छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हथकरघा परिधानों, बुनकरों की कला एवं प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित किया गया। विभाग द्वारा भविष्य में भी हथकरघा एवं ग्रामोद्योग से जुड़े उत्पादों और प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न गतिविधियों के आयोजन की दिशा में कार्य किया जाएगा।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button