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राज्योत्सव में छाया ग्रामोद्योग का हुनर, ‘शिल्प कुंज’ और ‘कौशल फैब्स’ बने आकर्षण का केंद्र

छत्तीसगढ़ की विरासत का क्यूआर कोड के माध्यम से प्रदर्शन

रायपुर। राज्योत्सव 2026 में मुख्यमंत्री की मंशानुरूप एवं ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव के निर्देश पर ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा (IAS) के द्वारा शिल्पग्राम में ग्रामोद्योग विभाग के समस्त घटकों रेशम, हाथकरघा, खादी तथा ग्रामोद्योग, माटीकला बोर्ड एवं हस्तशिल्प विकास बोर्ड के माध्यम से प्रदेश के उत्कृष्ट बुनकरों, शिल्पियों एवं कारीगरों द्वारा निर्मित वस्त्रों एवं सामग्रियों का जीवंत प्रदर्शन शिल्पग्राम परिसर में निर्मित ‘शिल्प कुंज’ में किया गया।

शिल्प कुंज में हाथकरघा संघ के प्रीमियम ब्रांड ‘कौशल फैब्स’ के अंतर्गत बुनकरों द्वारा बनाए गए अलसी जैकेट, बस्तर एवं सुकमा जिले की पुनर्वासित महिलाओं द्वारा बनाए गए कपड़ों के सॉफ्ट टॉयज, की-चेन, खिलौने तथा हाथकरघा संघ के उपलब्ध वस्त्रों को नवीन डिजाइन विकसित कराकर निर्मित होम डेकोर उत्पाद जैसे- वाटर बैग, टिफिन बैग, टेबल रनर, वॉल डेकोर, सोफा कवर, पैरदान, योगा ड्रेस एवं योगा मैट तथा ऑटोमोबाइल क्षेत्र के अंतर्गत नवीन विकसित आकर्षक एवं ईको-फ्रेंडली सीट कवर आदि का जीवंत प्रदर्शन किया गया।

राज्योत्सव में पहली बार हाथकरघा वस्त्रों के परिधानों का बस्तर एवं सुकमा जिले की पुनर्वासित महिलाओं एवं बुनकरों के पुत्र-पुत्रियों द्वारा रैंप वॉक किया गया, जिसे दर्शकों द्वारा खूब पसंद किया गया। शिल्पग्राम में ग्रामोद्योग विभाग के बुनकरों, शिल्पियों, कारीगरों एवं कृमिपालक हितग्राहियों के जीवन इतिहास एवं सफलता की कहानियों को क्यूआर कोड के माध्यम से आम नागरिकों तक पहुंचाया गया।

शिल्प कुंज में हस्तशिल्प एवं माटीकला की सामग्रियों तथा खादी बोर्ड के उत्पादों का जीवंत प्रदर्शन कर प्रचार-प्रसार किया गया, जिसे विभिन्न जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों एवं आम नागरिकों द्वारा खूब सराहा गया। शिल्पग्राम में रेशम विभाग द्वारा टसर एवं मल्बरी कृमि पालन, धागाकरण तथा अमारी रेशम सेतु का जीवंत प्रदर्शन किया गया।

ग्रामोद्योग विभाग के शिल्पग्राम में हाथकरघा, रेशम, हस्तशिल्प, खादी बोर्ड तथा माटीकला के कुल 64 स्टॉल लगाए गए थे। तीन दिवसीय राज्योत्सव में हाथकरघा वस्त्रों की राशि 33.57 लाख रुपये, हस्तशिल्प सामग्रियों की राशि 12.80 लाख रुपये, माटीकला उत्पादों की राशि 4.11 लाख रुपये एवं खादी वस्त्रों तथा सामग्रियों की राशि 2.36 लाख रुपये सहित कुल 52.84 लाख रुपये की बिक्री हुई।

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