
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अनूठी पहल ‘विष्णु के पाती’ लोगों के दिलों को छू रही है। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय द्वारा प्रसिद्ध साहित्यकार एवं कवि श्री मीर अली मीर को भेजे गए आत्मीय पत्र ने उन्हें अंतर्देशीय और पोस्टकार्ड के पुराने दौर की याद दिला दी। मुख्यमंत्री का स्नेहभरा संदेश पढ़कर वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने तत्काल पत्र का जवाब लिखकर मुख्यमंत्री को भेजने की तैयारी कर ली।
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ी भाषा, साहित्य और लोकसंस्कृति को समृद्ध बनाने में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने श्री मीर की प्रसिद्ध रचना ‘नंदा जाही का रे’ का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी रचनाओं में छत्तीसगढ़ की माटी की महक, लोकजीवन की सादगी, रिश्तों की आत्मीयता और अपनी संस्कृति के प्रति गहरा प्रेम दिखाई देता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संदेश में कहा कि साहित्यकारों की रचनाएं समाज को अपनी जड़ों से जोड़े रखने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। श्री मीर अली मीर की रचनाएं नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ी बोली, संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराने के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति गौरव का भाव भी जगाती हैं। मुख्यमंत्री ने उनके निरंतर साहित्य सृजन की कामना करते हुए शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री का पत्र मिलने पर श्री मीर अली मीर ने अपनी खुशी साझा करते हुए कहा, “हमारे प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की ओर से मुझे ‘विष्णु के पाती’ प्राप्त हुई। यह बहुत अच्छी पहल है। आज के समय में जब पत्र लिखने की परंपरा लगभग समाप्त होती जा रही है, मुख्यमंत्री जी ने इसे फिर से जीवंत करने का प्रयास किया है।”
उन्होंने बताया कि लिफाफे में शुभकामना संदेश के साथ पत्रोत्तर के लिए एक कार्ड भी रखा गया था। इसे देखकर उन्हें वह समय याद आ गया, जब लोग अंतर्देशीय पत्र और पोस्टकार्ड के माध्यम से अपने विचार और भावनाएं एक-दूसरे तक पहुंचाते थे।
श्री मीर ने कहा, “पत्र पढ़ते ही मैंने तत्काल इसका जवाब लिखने का मन बना लिया। मैं मुख्यमंत्री जी को पत्रोत्तर भेज रहा हूं। मेरी इच्छा है कि वे भी मेरा जवाब पढ़ें और बताएं कि उन्हें कैसा लगा। इस तरह पत्र लिखने और उसका जवाब देने की यह सुंदर परंपरा आगे भी बनी रहे।”





