
रायपुर। मुख्यमंत्री की मंशानुरूप एवं ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव के निर्देश पर ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा (IAS) के द्वारा अक्टूबर 2026 में प्रदेश के 26 जिलों की 302 बुनकर सहकारी समितियों को राशि 760.00 लाख रुपये एवं 3 नवंबर 2026 को 49 बुनकर सहकारी समितियों को राशि 150.00 लाख रुपये तथा 128 महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से राशि 31.00 लाख रुपये, कुल राशि 941.00 लाख रुपये (नौ करोड़ इकतालीस लाख रुपये) का पारिश्रमिक भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में RTGS के माध्यम से हस्तांतरित किया गया है।
राज्य हाथकरघा संघ द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में 3 नवंबर 2026 तक प्रदेश की 345 बुनकर सहकारी समितियों को बुनाई पारिश्रमिक राशि 5487.00 लाख रुपये, 2005 महिला स्व-सहायता समूहों को सिलाई पारिश्रमिक राशि 2117.00 लाख रुपये, कल्याणकारी योजनांतर्गत बुनकरों की आकस्मिक मृत्यु होने पर 29 आश्रित परिवारों को आर्थिक सहायता अनुदान राशि 5.80 लाख रुपये एवं हाथकरघा क्षेत्र के पुरस्कृत 11 हितग्राहियों को राशि 3.74 लाख रुपये की मासिक आर्थिक सहायता वितरित की गई है। इस प्रकार हाथकरघा संघ के द्वारा कुल राशि 7613.54 लाख रुपये (छिहत्तर करोड़ तेरह लाख चौवन हजार रुपये) का भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में RTGS के माध्यम से हस्तांतरित किया गया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप एवं गजेंद्र यादव, मंत्री छत्तीसगढ़ शासन ग्रामोद्योग विभाग के निर्देश पर ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा (IAS) के द्वारा राज्य के बुनकरों को बुनाई कार्य के माध्यम से तथा महिला स्व-सहायता समूहों को गणवेश सिलाई कार्य के माध्यम से स्थानीय स्तर पर ही सतत रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।
माननीय मुख्यमंत्री जी की मंशानुरूप “वोकल फॉर लोकल” की अवधारणा को सार्थक बनाने में ग्रामोद्योग विभाग द्वारा सकारात्मक प्रयास किया जा रहा है, जिसका लाभ प्रदेश के बुनकरों एवं सिलाई कार्य से जुड़े समूहों को प्राप्त हो रहा है।
माननीय मुख्यमंत्री जी श्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार ग्रामोद्योग विभाग द्वारा जिला सुकमा, बस्तर, कोरबा एवं जशपुर की 30 पुनर्वासित महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण देकर राज्य हाथकरघा संघ के अनुपयोगी/कटपीस वस्त्रों से विभिन्न प्रकार के खिलौने, थैले एवं वाटर बैग बनाने का कार्य आदेश देकर, उनके घर पर ही निःशुल्क सिलाई मशीन उपलब्ध कराकर स्वरोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में सार्थक प्रयास किया जा रहा है, ताकि आय का नवीन साधन उपलब्ध हो सके।





