
नवंबर की शुरुआत के साथ सड़क पर सफर करने वालों, मोबाइल उपभोक्ताओं और पेंशनभोगियों के लिए कई जरूरी व्यवस्थाएं सामने आई हैं। कहीं स्थानीय लोगों को सालाना टोल पास की सुविधा मिलेगी, तो कहीं वाहनों की आवाजाही और भुगतान के नियम बदल रहे हैं। इस महीने बैंक जाने और जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की योजना भी समय रहते बनानी होगी। जानिए सात प्रमुख बातें।
- स्थानीय टोल पास का शुल्क ₹1,500 या ₹3,000
राष्ट्रीय राजमार्ग के पात्र टोल प्लाजा से 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले गैरव्यावसायिक वाहन मालिकों के लिए 1 नवंबर 2026 से रियायती सालाना स्थानीय पास की व्यवस्था लागू है।
नगरपालिका या स्थानीय शहरी सीमा के बाहर स्थित प्लाजा पर इसका शुल्क ₹1,500 सालाना, जबकि इन सीमाओं के भीतर स्थित प्लाजा पर ₹3,000 सालाना होगा। वाहन पर वैध और चालू FASTag जरूरी है।
पास केवल संबंधित टोल प्लाजा पर चलेगा। दूरी के आधार पर टोल वसूलने वाले मार्गों और सर्विस रोड या वैकल्पिक सड़क उपलब्ध होने वाली जगहों पर यह सुविधा नहीं मिलेगी। पात्र प्लाजा पर पास नवंबर से और राजमार्गयात्रा ऐप पर 1 दिसंबर से उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
- दिल्ली में वाहन प्रवेश पर पाबंदियां, मुंबई-पुणे लिंक पर भी रोक
दिल्ली की प्रदूषण नियंत्रण योजना में 1 नवंबर से बाहर पंजीकृत और BS-VI मानक से नीचे के वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध का प्रावधान है। CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को छूट दी गई है। दिल्ली जाने से पहले वाहन की श्रेणी, उत्सर्जन मानक और लागू छूट देखना जरूरी होगा।
दूसरी ओर, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के नए कनेक्टिंग लिंक पर मालवाहक वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित की गई है। इसमें छोटे मालवाहक वाहन भी शामिल हैं। इन्हें एक्सप्रेसवे के पुराने मार्ग से जाना होगा। आदेश अगले निर्देश तक प्रभावी रहेगा।
- GST में सुधारों की मंजूरी, लागू तारीख अधिसूचना से तय होगी
GST परिषद ने रिफंड की प्रक्रिया तेज करने और कारोबारियों का अनुपालन आसान बनाने के लिए कई सुधार सुझाए हैं। इनमें कुछ श्रेणियों में सिस्टम के जरिए रिफंड मंजूर करने की व्यवस्था भी शामिल है।
पिछले वित्त वर्ष में ₹5 करोड़ तक के कुल कारोबार वाले और केवल अपंजीकृत ग्राहकों को सामान या सेवाएं देने वाले कारोबारियों के लिए वैकल्पिक वार्षिक रिटर्न और तिमाही भुगतान व्यवस्था के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है।
परिषद की घोषणा के अनुसार, इन निर्णयों को संबंधित अधिसूचनाओं, परिपत्रों और कानूनी संशोधनों से प्रभावी किया जाएगा। इसलिए सभी प्रस्तावों को एक साथ 1 नवंबर से लागू नई व्यवस्था बताना सही नहीं होगा।





