
नई दिल्ली. भारत स्टील 2026 की मेजवानी के लिए देश तैयार है । भारत स्टील इस्पात के भविष्य को नया आकार देने वाला एक वैश्विक मंच है । इसका उद्देश्य इस्पात के अनुसंधान एवं विकास, डिजिटलीकरण, नवाचार और उच्च कुशल इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी मानव संसाधनों तक पहुँच के माध्यम से निर्मित वैश्विक इस्पात उत्पादन के अगले युग को प्रदर्शित करने का है । नई दिल्ली में आयोजित होने वाले इस दो दिवसीय शिखर सम्मेलन का लक्ष्य नीति निर्माताओं, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक साथ लाकर इस दशक की प्रमुख चुनौतियों का सामना करना; सुगम शृंखलाओं का निर्माण और कम उत्सर्जन वाले इस्पात उत्पादन की ओर संक्रमण को गति देना है ।
भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने जोर देते हुए कहा कि “इस्पात ने आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं में ढांचे की तरह एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है ।” उन्होनें कहा कि चाहे गगनचुंबी इमारतें हों, जहाजरानी, राजमार्ग, उच्च-गति रेल, स्मार्ट शहर या औद्योगिक गलियारे हों, इस्पात हर सफलता की कहानी की शक्ति है । उन्होंने इंडिया स्टील 2025 के दौरान कहा, “भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रयासरत है, जिसमें इस्पात क्षेत्र इस मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है ।” उन्होंने भारत के विश्व का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक होने पर गर्व व्यक्त किया ।
प्रधानमंत्री का यह दृष्टिकोण इस वर्ष के भारत इस्पात शिखर सम्मेलन की आधारशिला है, जिसका उद्देश्य आर्थिक अनिश्चितता, खंडित व्यापार प्रवाह, बढ़ते संरक्षणवादी शुल्क और शुद्ध शून्य लक्ष्यों को प्राप्त करने की तत्काल आवश्यकता के दौर में इस्पात क्षेत्र के लिए एक वैश्विक रूपरेखा तैयार करना है ।
भारत का नेतृत्व, क्षमता और महत्वाकांक्षा दोनों में निहित है : एक तो यह कि भारत पहले से ही सबसे बड़े इस्पात उत्पादकों में से एक है, और दूसरा यह कि उसने वर्ष 2030 तक 300 एमटी और वर्ष 2047 तक 500 एमटी इस्पात उत्पादन क्षमता का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया है । भारत में इस्पात की मांग बुनियादी ढांचे, आवास, रेलवे, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही है । लेकिन 500 एमटी का लक्ष्य हासिल करने के लिए केवल अतिरिक्त क्षमता की आवश्यकता नहीं है; इसके लिए सुरक्षित कच्चे माल, पूर्वानुमानित नियम और नवाचार-आधारित आधुनिकीकरण की आवश्यकता है । घरेलू बेनेफिशिएसन को मजबूत करना, कोकिंग कोल पर निर्भरता कम करना, बेहतर लॉजिसटिक्स और कुशल अनुमोदन इस आपूर्ति-पक्ष के प्रयासों की रीढ़ है ।
स्पेशल्टी स्टील के लिए सरकार की उत्पादन से सम्बद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना इस क्षेत्र को नया रूप दे रही है, जिससे भारत कमोडिटी-ग्रेड उत्पादन से हटकर उच्च-मूल्य वाले प्रीसिशन इंजिनीयर्ड स्टील की ओर अग्रसर हो रहा है, जो एयरस्पेस, ऑटोमोटिव, रक्षा और उन्नत अवसंरचना के लिए आवश्यक है ।
‘हरित’ इस्पात भारत की प्रतिस्पर्धा का आधार है । इस्पात मंत्रालय की वर्ष 2024 हरित इस्पात रूपरेखा में स्वच्छ ऊर्जा एकीकरण, हरित हाइड्रोजन प्रायोगिक परियोजनाओं, सीसीयूएस का उपयोग, स्क्रैप के विस्तारित उपयोग और प्रत्यक्ष इलेक्ट्रोलीसिस जैसे उभरते मार्गों की दिशा में संक्रमण की रूपरेखा दी गई है ।
डिजिटलीकरण, जिसमें आईओटी निगरानी, रोबोटिक्स, स्वचालन और पूर्वानुमानित रख-रखाव शामिल हैं, शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख विषय होगा । एआई-आधारित अनुकूलन से दक्षता में वृद्धि, अपशिष्ट में कमी और गुणवत्ता में सुधार का वादा किया गया है । इस तकनीकी प्रोत्साहन को विस्तारित अनुसंधान एवं विकास, गहन साझेदारी, स्पष्ट प्रोद्योगिकी हस्तांतरण मार्गों और उभरती प्रक्रियाओं के लिए प्रायोगिक-स्तरीय परीक्षणों द्वारा सुदृढ़ किया जाएगा ।
वैश्विक व्यापार में कार्बन लेखांकन मानदंडों की ओर बढ़ते कदम के साथ, भारत का लक्ष्य कम कार्बन उत्सर्जन वाले उच्च गुणवत्ता वाले इस्पात के प्रमुख निरतातक के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करना है । राष्ट्रीय इस्पात रणनीति में हाइड्रोजन आधारित डीआरआई, सीसीयूएस और इलेक्ट्रोलीसिस प्रौद्योगिकियों में संयुक्त उद्यमों को प्राथमिकता दी गई है, जिन्हें लक्षित निवेश प्रोत्साहनों द्वारा समर्थन दिया गया है ।
इस प्रकार, भारत स्टील शिखर सम्मेलन एक महत्वपूर्ण क्षण है, एक ऐसा क्षण जिसमें भारत एक ऐसे इस्पात क्षेत्र के लिए वैश्विक रूपरेखा तैयार करना चाहता है, जो सुरक्षित, प्रतिस्पर्धी, जलवायु के अनुकूल और भविष्य के लिए तैयार हो । यह दिशा सुनिश्चित करेगी कि इस्पात न केवल भारत के बुनियादी ढांचे की रीढ़ बना रहे, बल्कि टिकाऊ प्रगति और वैश्विक औद्योगिक नेतृत्व का आधार भी हो ।
शिखर सम्मेलन में इस्पात मूल्य-शृंखला के विभिन्न पहलुओं का प्रतिनिधित्व करने वाले 700 से अधिक वैश्विक प्रतिनिधि भाग लेंगे । साझेदार देशों का मंडप, साझेदार राज्यों का मंडप, सार्वजनिक क्षेत्र के “महारत्न”, इस्पात और सम्बद्ध क्षेत्र के अग्रणी निजी क्षेत्र के उद्यम, स्केल-अप और स्टार्ट-अप, नवप्रवर्तक और निवेशक, आत्मनिर्भरता, नवाचार, तकनीकी रूप से उन्नत और आर्थिक रूप से सुगम देश पर जोर देकर प्रधानमंत्री जी के विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को मजबूत करने के शिखर सम्मेलन के व्यापक उद्देश्य के महत्व को बढ़ाएंगे ।





