
सुकमा। विकास की योजनाओं का असर तभी सार्थक माना जाता है, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसी सोच के साथ छत्तीसगढ़ शासन के खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के सचिव एवं सुकमा जिले के प्रभारी सचिव राजेश सिंह राणा ने मंगलवार को जिले के एक दिवसीय प्रवास के दौरान विकास, पुनर्वास और कौशल उन्नयन से जुड़ी गतिविधियों का जमीनी जायजा लिया।
जिला कार्यालय में अधिकारियों की समीक्षा बैठक के बाद राणा विभिन्न स्थानों पर पहुंचे और शासन की योजनाओं की प्रगति देखी। इस दौरान कलेक्टर अमित कुमार, पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर एवं जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुंद ठाकुर उनके साथ मौजूद रहे।

हुनर को बनाया जाएगा आजीविका का आधार
प्रभारी सचिव ने लाइवलीहुड कॉलेज पहुंचकर पुनर्वासित युवाओं के लिए विशेष कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। ग्रामोद्योग विभाग की पहल से शुरू किए गए दो माह के प्रशिक्षण कार्यक्रम में 20 युवाओं को कोसा से सिल्क निकालने, उन्नत हथकरघा पर साड़ी बुनने और आधुनिक सिलाई का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पहल के पीछे उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि युवाओं के हाथों में ऐसा हुनर देना है, जिसे वे आगे चलकर अपनी आजीविका का आधार बना सकें। पारंपरिक कोसा और हथकरघा कला को आधुनिक कौशल से जोड़कर युवाओं के लिए स्वावलंबन के नए रास्ते तैयार करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

20 युवाओं को 5G स्मार्टफोन, पुनर्वासित युवाओं के साथ किया भोजन
लाइवलीहुड कॉलेज के बाद प्रभारी सचिव पुनर्वास केंद्र पहुंचे। यहां उन्होंने पुनर्वासित युवाओं के साथ औपचारिकता से अलग हटकर सहज और आत्मीय माहौल में संवाद किया। उन्होंने युवाओं की बातें सुनीं और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
डिजिटल दौर में युवाओं को तकनीक से जोड़ने की पहल के तहत 20 पुनर्वासित युवाओं को 5G स्मार्टफोन वितरित किए गए। स्मार्टफोन मिलने से युवाओं को डिजिटल माध्यमों से जुड़ने और तकनीक का उपयोग करने का अवसर मिलेगा।
इस दौरान श्री राणा का सहज और संवेदनशील व्यवहार विशेष रूप से चर्चा में रहा। पुनर्वासित युवाओं द्वारा तैयार किए गए भोजन को उन्होंने उन्हीं के साथ ग्रहण किया। प्रशासनिक अधिकारी और युवाओं के बीच की औपचारिक दूरी को कम करती यह तस्वीर कार्यक्रम का मानवीय पक्ष सामने लाई।

विकास के साथ विश्वास का संदेश
प्रभारी सचिव का यह दौरा केवल योजनाओं के निरीक्षण तक सीमित नहीं रहा। पुनर्वासित युवाओं के बीच जाकर उनसे बातचीत करना, उनके साथ भोजन करना और उन्हें कौशल तथा डिजिटल संसाधनों से जोड़ना इस बात का संदेश देता है कि पुनर्वास का उद्देश्य केवल किसी व्यक्ति को मुख्यधारा में वापस लाना नहीं, बल्कि उसे सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर देना भी है।
तुंगल डैम में पर्यटन की संभावनाओं का लिया जायजा
प्रवास के अंतिम चरण में राणा तुंगल डैम पहुंचे। उन्होंने डैम की प्राकृतिक सुंदरता और वहां मौजूद पर्यटन की संभावनाओं का अवलोकन किया। उन्होंने कलेक्टर को क्षेत्र को एक सुव्यवस्थित और प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। तुंगल डैम में भ्रमण के लिए पहुंचे स्कूली बच्चों से भी प्रभारी सचिव ने आत्मीय बातचीत की। उन्होंने बच्चों से उनकी पढ़ाई और स्कूल से जुड़ी जानकारी ली तथा उन्हें बेहतर भविष्य के लिए प्रेरित किया। सुकमा प्रवास के दौरान प्रभारी सचिव ने एक ही दौरे में विकास की समीक्षा, पुनर्वासित युवाओं का कौशल उन्नयन, डिजिटल सशक्तिकरण, आत्मीय संवाद और पर्यटन विकास इन सभी पहलुओं पर ध्यान दिया। उनके दौरे में प्रशासनिक सक्रियता के साथ मानवीय संवेदनशीलता की तस्वीर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी।






