
दिन भर बैठकर 6 विश्वविद्यालयों के 50 विभागाध्यक्षों व प्राध्यापकों के साथ आयोग ने बारीकी से समीक्षा कर अंतिम रूप प्रदान करवाया
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग रायपुर द्वारा बाल अधिकारों के संरक्षण के क्षेत्र में 6 विश्वविद्यालयों से एम.ओ.यू. संपादित कर एक वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पाठ्यक्रम ’’रक्षक’’ आरंभ करने हेतु कार्यवाही की गई थी । इसी कार्यवाही को आगे बढ़ाते हुए 15 अप्रैल 2026 को रायपुर में एक दिवसीय अंतर्विश्वविद्यालयीन परामर्श बैठक का आयोजन किया गया। दिन भर चिंतन मंथन करते हुए इस बैठक में ’’रक्षक’’ पाठ्यक्रम के आठ प्रश्न पत्रों की उप इकाईयों को अंतिम रूप दे दिया गया। इस परामर्श बैठक में आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, सचिव श्री प्रतीक खरे, प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल कुलपति पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, प्रो. मनोज दयाल कुलपति कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, डॉ. पीयूष कांत पाण्डेय कुलपति एमिटी युनिवर्सिटी, डॉ. टी. रामाराव कुलपति आंजनेय विश्वविद्यालय, डॉ. संदीप श्रीवास्तव कुलपति श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल विश्वविद्यालय, सुनील कुमार शर्मा कुलसचिव कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, प्रवीण अग्रवाल उप कुलसचिव संत गहिरा गुरू विश्वविद्यालय एवं समय नारायण उपाध्याय संत गहिरा गुरू विश्वविद्यालय उपस्थित थे। इनके साथ ही इन विश्वविद्यालयों के 50 से अधिक विभागाध्यक्ष व सहायक प्राध्यापक उपस्थित थे । इस अवसर पर आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि रक्षक पाठ्यक्रम केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक सशक्त सामाजिक अभियान है।

हम सभी का सामूहिक प्रयास है कि इस पहल को अंतिम स्वरूप देकर इसे प्रभावी रूप से लागू किया जाए, जिससे आने वाली पीढ़ी सुरक्षित एवं जागरूक बन सके। इस अवसर पर सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने अपने उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की यह पहल न केवल प्रशंसनीय है, बल्कि अपने आप में पूरे देश में अनूठी है । उन्होंने पिछले दस माहों से लगातार इस पाठ्यक्रम के लिए विश्वविद्यालयों का मार्गदर्शन करने के लिए अपना हृदय से आभार व्यक्त करते हुए आयोग की भूरि-भूरि प्रशंसा की। द्वितीय सत्र में सभी छः विश्वविद्यालयों द्वारा पाठ्यक्रम के अनुरूप प्रश्नपत्रों व उपइकाईयों पर विस्तार से प्रस्तुति दी। अंत में सभी विश्वविद्यालयों ने अन्य दूसरे विश्वविद्यालयों के प्रस्तुतियों पर अपने अभिमत भी प्रस्तुत किये । सभी छः विश्वविद्यालयों ने मिलकर पाठ्यक्रम में आवश्यक सुधार भी समाहित किये । यह पहला अवसर था जब छः विश्वविद्यालय एक साथ एक मंच पर बच्चों के संरक्षण के लिए न केवल आगे आये बल्कि पाठ्यक्रम आरंभ करने को अंतिम रूप प्रदान किया ।





