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होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड पायलट प्रोजेक्ट के रूप में होगा लागू

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल, रायपुर द्वारा अध्यक्ष रेणु जी. पिल्ले के संरक्षण, सचिव पुष्पा साहू के निर्देशन तथा भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय के परख (PARAKH), एनसीईआरटी, नई दिल्ली की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. इन्द्राणी भादुड़ी के संयोजन में 17 से 19 सितंबर 2026 तक छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल के सभाकक्ष में राज्य स्तरीय होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड (HPC) प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण में प्रतिदिन 11-11 जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों तथा प्रत्येक जिले से पायलट प्रोजेक्ट के लिए चयनित 03-03 हायर सेकण्डरी स्कूलों के प्राचार्यों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। कार्यशाला के माध्यम से चयनित विद्यालयों में होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किए जाने की दिशा में आवश्यक प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

कार्यक्रम में उपसचिव डॉ. बी. रघु ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। कोई भी बच्चा ज्ञान से शून्य नहीं होता, बल्कि वह जीवनपर्यंत सीखता रहता है। बच्चों के ज्ञानात्मक, भावनात्मक एवं मनोप्रेरक क्षेत्रों के विकास तथा उनके समग्र मूल्यांकन में होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह व्यवस्था शिक्षकों को सतत् सीखने तथा बच्चों को निरंतर सीखने के लिए प्रेरित करेगी।

डॉ. प्रदीप कुमार साहू, सहायक प्राध्यापक एवं परख कोऑर्डिनेटर ने होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड छात्रों के मूल्यांकन की एक नई एवं व्यापक पद्धति है, जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत परख, एनसीईआरटी, नई दिल्ली द्वारा डिजाइन किया गया है। एचपीसी विद्यार्थियों के मूल्यांकन की 360 डिग्री रिपोर्ट के रूप में कार्य करता है। इसमें पारंपरिक अकादमिक उपलब्धियों के साथ-साथ विद्यार्थी के संज्ञानात्मक, भावात्मक, सामाजिक-भावनात्मक एवं मनोप्रेरक क्षेत्रों में होने वाले समग्र विकास को भी शामिल किया गया है।

प्रशिक्षण के दौरान रिसोर्स पर्सन श्री हारेन्द्र भुवाल ने होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड के पार्ट-ए के खण्ड-3 ‘समय प्रबंधन’ पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों की समय संबंधी आदतों को समझने के लिए विभिन्न गतिविधियों एवं उदाहरणों के माध्यम से बताया कि विद्यार्थी किन कार्यों में अधिक समय व्यतीत करना चाहते हैं तथा समय प्रबंधन के माध्यम से उनके व्यवहार एवं सीखने की आदतों का किस प्रकार आकलन किया जा सकता है।

रिसोर्स पर्सन डॉ. माधुरी बोरेकर ने समस्या समाधान आधारित जांच के लिए प्रोजेक्ट एवं लघु शोध की प्रक्रिया को उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने शिक्षक द्वारा विद्यार्थी के, विद्यार्थी द्वारा स्वयं के तथा सहपाठियों द्वारा विकसित किए जाने वाले कौशलों के मूल्यांकन की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी। इसी क्रम में श्रीमती अंशु गुलाटी ने विद्यार्थियों द्वारा सामूहिक कार्य को प्रभावी ढंग से किए जाने के विभिन्न तरीकों को उदाहरण सहित प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि सामूहिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में विकसित होने वाली जागरूकता, संवेदनशीलता एवं सृजनात्मकता का आकलन किया जा सकता है।

प्रशिक्षण के दौरान रिसोर्स पर्सन श्री राजकुमार गेन्डे ने कक्षा, समूह एवं व्यक्तिगत कार्यों के दौरान विद्यार्थियों के बीच होने वाले परस्पर संवाद तथा शिक्षक एवं विद्यार्थी के मध्य संवाद के सूक्ष्म अवलोकन के माध्यम से व्यक्तित्व विकास से संबंधित जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया समझाई। वहीं श्रीमती सीमा वर्मा ने होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड के प्रथम खण्ड के अंतर्गत विद्यार्थी की सामान्य जानकारी एवं स्वयं के परिचय को प्रस्तुत करने की प्रक्रिया तथा स्व-मूल्यांकन के महत्व पर विस्तार से जानकारी प्रदान की।

राज्य स्तरीय इस प्रशिक्षण सह कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन के साथ-साथ उनके ज्ञानात्मक, भावनात्मक, सामाजिक-भावनात्मक एवं मनोप्रेरक विकास का समग्र एवं सतत् मूल्यांकन सुनिश्चित करना है। होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड के पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से विद्यार्थियों की विविध क्षमताओं, कौशलों, व्यवहार एवं सीखने की प्रक्रिया का व्यापक आकलन करते हुए उनके सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

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